“महाराष्ट्र हिंसा मामले में न्यायिक जांच की घोषणा, फडणवीस ने कहा- संविधान की अवहेलना बर्दाश्त नहीं”
नागपुर : महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने हाल ही में परभणी हिंसा मामले की न्यायिक जांच कराने की घोषणा की, जो राज्य में एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम के रूप में सामने आया है। नागपुर में महाराष्ट्र विधानसभा के शीतकालीन सत्र के दौरान मुख्यमंत्री ने इस मुद्दे पर अपनी प्रतिक्रिया दी और कहा कि राज्य सरकार इस हिंसा मामले में पूरी पारदर्शिता और निष्पक्षता से जांच कराएगी, ताकि दोषियों को जल्द से जल्द सजा मिल सके।
फडणवीस ने इस दौरान एक महत्वपूर्ण बयान भी दिया, जिसमें उन्होंने बाबासाहेब आंबेडकर के योगदान को उजागर किया और कहा कि आंबेडकर किसी एक जाति के नहीं बल्कि पूरे समाज के नेता हैं, और उनका योगदान सभी नागरिकों के लिए है। इस बात को रखते हुए, मुख्यमंत्री ने संविधान की अवहेलना या उसकी प्रति में किसी भी प्रकार की छेड़छाड़ को बर्दाश्त नहीं किए जाने की बात भी कही।
इसके साथ ही, महाराष्ट्र विधानसभा में शिवसेना (यूबीटी) के विधायक सुनील प्रभु ने एक और गंभीर मुद्दा उठाया। उन्होंने कल्याण क्षेत्र में एक मराठी परिवार पर हुए हमले का जिक्र किया और आरोपियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की। प्रभु का कहना था कि ऐसे अपराधों पर कड़ी नज़र रखी जाए और जिन लोगों ने इस हमले को अंजाम दिया है, उनके खिलाफ तुरन्त कार्रवाई की जाए। डिप्टी सीएम अजित पवार ने इस पर भी अपने विचार साझा किए और कहा कि वे विधानसभा में विधायक सुनील प्रभु द्वारा दी गई जानकारी का सत्यापन करेंगे और कार्रवाई करेंगे। पवार ने यह भी कहा कि अगर आरोपियों में कोई भी व्यक्ति बड़ा या प्रभावशाली है, तो भी उसे कार्रवाई से बचने नहीं दिया जाएगा, और राज्य में मराठी लोगों की गरिमा को बनाए रखने के लिए पूरी मेहनत की जाएगी।
इस पूरी घटना ने महाराष्ट्र की राजनीति में नए विवादों को जन्म दिया है, साथ ही इस मुद्दे के चलते राज्य सरकार की तत्परता और निर्णय प्रक्रिया पर भी ध्यान खींचा है। मुख्यमंत्री फडणवीस और डिप्टी सीएम अजित पवार के बयान ने यह साफ कर दिया है कि हिंसा या किसी भी प्रकार के गलत कृत्य को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
