पन्ना के किसान खेतों में खेती छोड़ खदान खोदकर हीरा तलाश रहे

मध्य प्रदेश का पन्ना जिला अपने उच्च गुणवत्ता वाले हीरों के लिए विश्वभर में प्रसिद्ध है। जिले के मनोर पंचायत के जरुआपुर, बृजपुर और सरकोहा सहित कई ग्रामीण क्षेत्रों में किसान अब पारंपरिक खेती छोड़कर अपने खेतों में हीरे की निजी खदानें संचालित कर किस्मत आजमा रहे हैं। जरुआपुर के सरपंच प्रकाश मजूमदार को अब तक 12 से अधिक छोटे-बड़े हीरे मिल चुके हैं, जिनमें वर्ष 2024 में मिला 16.10 कैरेट का हीरा 86 लाख रुपये से अधिक में नीलाम हुआ था। वहीं किसान दिलीप मिस्त्री को वर्ष 2023 में 8 कैरेट का हीरा मिला था। किसान अपनी जमीन या 20 प्रतिशत साझेदारी पर ली गई जमीन पर हीरा कार्यालय से पट्टा लेकर खुदाई करते हैं। हालांकि यह काम पूरी तरह किस्मत पर निर्भर माना जाता है। कई किसानों को वर्षों की मेहनत के बाद भी सफलता नहीं मिली और वे मजदूरों की मजदूरी तक चुकाने के लिए कर्ज में डूब गए हैं। वहीं अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों, विशेषकर ईरान-अमेरिका तनाव के कारण हीरों की सरकारी नीलामी प्रभावित होने से भी कारोबार पर असर पड़ा है। किसानों का कहना है कि जहां पारंपरिक खेती में आय की संभावना निश्चित रहती है, वहीं हीरे की खुदाई में सफलता की कोई गारंटी नहीं होती। इसके बावजूद चमकते भविष्य की उम्मीद में किसानों का उत्साह बरकरार है। वर्ष 2026 में हीरा कार्यालय ने रिकॉर्ड 300 नए पट्टे जारी किए हैं, जिनमें 125 निजी खेतों के लिए हैं, जिससे जिले में हीरों की निजी खदानों का दायरा लगातार बढ़ रहा है।