“ईडी की शराब घोटाले की जांच जारी, मुख्यमंत्री साय का बयान – दोषियों पर होगी सख्त कार्रवाई”
रायपुर: छत्तीसगढ़ में 2,161 करोड़ रुपये के शराब घोटाले में पूर्व आबकारी मंत्री कवासी लखमा की गिरफ्तारी ने राज्य की राजनीति और प्रशासन को हिला दिया है। इस घोटाले को लेकर प्रवर्तन निदेशालय (ED) की जांच तेज़ हो गई है, और आज तीसरी बार कवासी लखमा और उनके बेटे हरीश लखमा से पूछताछ की गई, जिसके बाद उन्हें गिरफ्तार कर जस्टिस अतुल श्रीवास्तव की कोर्ट में पेश किया गया। कोर्ट ने उन्हें 7 दिन की रिमांड पर भेज दिया है, और इसके साथ ही मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने स्पष्ट किया कि ED की जांच जारी है और दोषियों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।
घोटाले की शुरुआत 2017 में हुई जब छत्तीसगढ़ सरकार ने आबकारी नीति में संशोधन किया और CSMCL के जरिए शराब बेचे जाने की इजाजत दी। इसके बाद 2019 में अनवर ढेबर नामक शख्स ने सिंडिकेट बनाने के लिए अरुणपति त्रिपाठी को CSMCL का प्रबंध निदेशक (MD) नियुक्त किया, और इसके बाद नियमों और कानूनों का उल्लंघन करते हुए भारी भ्रष्टाचार किया गया। इसके परिणामस्वरूप राज्य के राजस्व को काफी नुकसान हुआ, और शराब की अवैध बिक्री बढ़ गई।
इसी दौरान ईडी ने नवंबर 2022 में इस मामले में PMLA एक्ट के तहत एक चार्जशीट दाखिल की, जिसमें 2,161 करोड़ के घोटाले की जानकारी दी गई। चौंकाने वाली बात यह है कि इन अवैध क्रियाओं में राजनीति और कारोबारी रुकावटों को पार करते हुए ईडी ने खुलासा किया कि देशी शराब के एक केस पर 75 रुपये का कमीशन लिया जाता था, जो अधिकारियों और कारोबारी सिंडिकेट द्वारा बांटा जाता था।
यह घोटाला विभिन्न शराब कंपनियों के खिलाफ बड़ी कार्रवाई का कारण बना है और यह मामला न केवल छत्तीसगढ़, बल्कि भारत भर के राजनेताओं और अधिकारियों के भ्रष्टाचार के स्तर को बेनकाब कर रहा है। CSMCL की दुकानों से केवल तीन समूहों की शराब बेची जाती थी, जिससे बड़े पैमाने पर राजस्व की चोरी की गई थी, जिससे राज्य सरकार के लिए यह एक बड़ा संकट बन गया है। इस घोटाले के गंभीर परिणाम होंगे और आने वाले दिनों में अधिक गिरफ्तारियों और आरोपों की संभावना है।
