आदिवासियों के आशियानों पर चला बुलडोजर, बेदखली के खिलाफ ग्रामीणों ने मांगा न्याय

मध्य प्रदेश के सिंगरौली जिले के चितरंगी तहसील अंतर्गत ग्राम भुईधरवा में वन विभाग की कार्रवाई को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। ग्रामीणों का आरोप है कि बिना पूर्व सूचना दिए उनके घरों और काबिज जमीन पर कार्रवाई की गई, जिससे करीब 25 से 30 गरीब और आदिवासी परिवार प्रभावित हुए हैं। पीड़ित परिवारों ने कलेक्टर से मुलाकात कर अपनी पुश्तैनी जमीन से बेदखली रोकने और न्याय की मांग की है। ग्रामीणों का कहना है कि वे वर्ष 1969 से इस जमीन पर रह रहे हैं और खेती कर अपना जीवन चला रहे हैं। उनका दावा है कि इसी जमीन पर सरकार की ओर से प्रधानमंत्री आवास, हैंडपंप और बिजली जैसी सुविधाएं भी उपलब्ध कराई गई हैं। ग्रामीणों ने वन विभाग के एक कर्मचारी पर पट्टा दिलाने के नाम पर 40 हजार रुपये और बकरे की रिश्वत लेने का गंभीर आरोप भी लगाया है। उनका कहना है कि पट्टा देने के बजाय अब उनके मकानों को तोड़ा जा रहा है। बेदखली की कार्रवाई से नाराज ग्रामीणों ने 18 जुलाई तक समाधान नहीं होने पर चितरंगी तहसील कार्यालय के सामने धरना और प्रदर्शन की चेतावनी दी है। मामला सामने आने के बाद प्रशासन ने हस्तक्षेप करते हुए कार्रवाई फिलहाल रोक दी है और राजस्व एवं वन विभाग की संयुक्त टीम से जांच शुरू कराई गई है। अपर कलेक्टर ने भरोसा दिलाया है कि जांच में पात्र पाए जाने वाले भूमिहीन परिवारों को नियमानुसार पट्टा दिलाने की प्रक्रिया की जाएगी। वहीं, जिन मकानों को नुकसान पहुंचा है, उनके पुनर्वास और प्रभावित परिवारों के रहने-खाने की व्यवस्था कराने का भी आश्वासन दिया गया है।