ढाई करोड़ का धान हुआ ख़राब
सुकमा। किसानों से समर्थन मूल्य पर खरीदा गया 2 करोड़ 68 लाख रुपये मूल्य का धान या तो रिकॉर्ड से गायब मिला या फिर खुले में पड़े-पड़े अमानक हो गया। जिला स्तरीय सत्यापन में 1115.86 मीट्रिक टन धान रिकॉर्ड से कम पाया गया। जबकि 1295.90 मीट्रिक टन धान डेढ़ साल तक उठाव नहीं होने से खराब हो गया। इस धान को मिलिंग के बाद गरीब परिवारों को वितरित किया जाना था। विभाग ट्रांसपोर्टिंग पूरा होने की बात कह रहा है। लेकिन सवाल उठ रहा है कि लक्ष्य पूरा होने के बाद भी धान की सुरक्षा और समय पर उठाव क्यूँ नहीं हुआ। कई स्तरों की निगरानी व्यवस्था के बावजूद करोड़ों की सरकारी संपत्ति का नुकसान प्रशासनिक जवाबदेही पर बड़ा प्रश्नचिह्न बन गया है। इस नुकसान की जिम्मेदारी किसकी होगी।
