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क्या प्रदेश के मुखिया विधायकों का आयकर सरकारी खजाने से जाने की व्यवस्था को बदलने की हिम्मत करेंगे : कोमल हुपेंडी

रायपुर। आम आदमी पार्टी छत्तीसगढ़ के प्रदेश अध्यक्ष कोमल हुपेंडी ने छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल से जनता के टैक्स के पैसे से विधायकों का आयकर भरे जाने पर सवाल किया है। हुपेंडी ने कहा है कि क्या आपके विधायक आयकर देने में भी सक्षम नहीं हैं? जनता के पैसों की ऐसी बर्बादी क्यों की जा रही है। भूपेश बघेल में इतना भी नेतृत्व भाव नहीं की बड़ी बड़ी गाड़ियों में घूमने वाले और इतनी सुविधाओ के भोगी जनता के विधायक अपना इनकम टैक्स भी जनता से भरवाए, ये पूरी तरह गलत है। आम आदमी पार्टी आपसे निवेदन करती है कि इन विधायकों को स्वयं का आयकर विधायकों को स्वयं ही भरने को आदेशित करें। छत्तीसगढ़ में सभी विधायकों का इनकम टैक्स राज्य सरकार भरती है। वर्ष 2000 से ही यह व्यवस्था लागू है। सीएम मंत्रियों, विधानसभा अध्यक्ष, उपाध्यक्ष और नेता प्रतिपक्ष का इनकम टैक्स सरकार देती है। विधायकों के सिर्फ भत्तों पर इनकम टैक्स सरकार देती है। मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़, झारखंड सहित 7 राज्य ऐसे हैं जो किसी न किसी रूप में मुख्यमंत्री-मंत्रियों, विधायकों का सिर्फ वेतन ही नहीं, इस वेतन पर बनने वाला इनकम टैक्स भी सरकारी खजाने से चुका रहे हैं।
हुपेंडी ने कहा कि संवैधानिक पद पर बैठे व्यक्ति की आय उसकी व्यक्तिगत आय है। इसमें मुख्यमंत्री, मंत्री या विधायक के पद पर मिलने वाली उसका वेतन भी शामिल है। अपनी निजी आय पर टैक्स भरने की जिम्मेदारी व्यक्तिगत होती है, इसे सरकारी खजाने से अदा नहीं किया जा सकता। यदि किसी भी पद पर आसीन व्यक्ति का आयकर सरकारी खजाने से भरा जा रहा है तो यह कानून और संविधान के खिलाफ है।
उत्तर प्रदेश में भी मंत्री वेतन, भत्ते और विविध कानून, 1981′ के तहत उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री और मंत्रियों के इनकम टैक्स का भुगतान 2019 तक राजकीय कोष से किया जाता रहा है। पूर्व मुख्यमंत्री वीपी सिंह के कार्यकाल में बने इस कानून से अब तक 19 मुख्यमंत्री और करीब हजार मंत्री लाभान्वित हुए हैं,लेकिन 2019 में उत्तरप्रदेश में व्यवस्था बदल दी। हिमाचल प्रदेश में भी हिमाचल प्रदेश हाई कोर्ट ने राज्य सरकार को नोटिस जारी कर इस मामले पर जवाब मांगा था। तब जाकर राज्य सरकार ने अप्रैल 2022 में कैबिनेट में फैसला लिया है कि अब वेतन पर टैक्स खुद विधायको और मंत्रियों को देना होगा तो ऐसा बदलाव छत्तीसगढ़ में क्यों नहीं किया जा रहा है?
आम आदमी पार्टी जनता के टैक्स के पैसे से इस तरह विधायकों का आयकर भरने का विरोध करती है और क्या प्रदेश के मुखिया इस व्यवस्था को बदलने की हिम्मत करेंगे?

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