तमिलनाडु के मुख्यमंत्री स्टालिन की पीएम मोदी से मुलाकात: राज्य के बकाया फंड को लेकर चर्चा

चेन्नई:  तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने शुक्रवार को नई दिल्ली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की, जिसमें उन्होंने राज्य में चल रही कल्याणकारी योजनाओं के लिए केंद्र सरकार से बकाया धन जल्द जारी करने का आग्रह किया। स्टालिन ने विशेष रूप से उन योजनाओं पर ध्यान केंद्रित किया, जिनका उद्देश्य राज्य के आर्थिक और सामाजिक विकास को बढ़ावा देना है। उन्होंने प्रधानमंत्री से आग्रह किया कि तमिलनाडु में जनकल्याणकारी योजनाओं के क्रियान्वयन के लिए राज्य को केंद्र से बकाया धन तुरंत उपलब्ध कराया जाए, ताकि इन योजनाओं में कोई बाधा न हो और जनता को समय पर लाभ मिल सके।

मछुआरों की सुरक्षा का मुद्दा उठाया

स्टालिन ने मुलाकात के दौरान प्रधानमंत्री से तमिलनाडु के मछुआरों की सुरक्षा को लेकर गहरी चिंता व्यक्त की। राज्य के मछुआरे, विशेषकर जो अंतरराष्ट्रीय समुद्री सीमाओं के नजदीक काम करते हैं, पड़ोसी देशों के साथ चल रहे विवादों के कारण अक्सर कठिनाइयों का सामना करते हैं। मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री से इस समस्या पर व्यक्तिगत रूप से ध्यान देने और हस्तक्षेप करने का अनुरोध किया, ताकि मछुआरों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके और उनकी आजीविका को कोई खतरा न हो। उन्होंने मछुआरों के हितों की रक्षा के लिए एक व्यापक और दीर्घकालिक नीति की आवश्यकता पर जोर दिया।

विपक्षी एकता पर चर्चा

प्रधानमंत्री से मुलाकात के बाद स्टालिन ने कांग्रेस की वरिष्ठ नेता और पूर्व अध्यक्ष सोनिया गांधी से भी भेंट की। यह बैठक आगामी विपक्षी गठबंधन की रणनीति को लेकर महत्वपूर्ण मानी जा रही है। कांचीपुरम में 28 सितंबर को आयोजित होने वाली एक बड़ी सार्वजनिक रैली से पहले यह मुलाकात विपक्षी दलों के बीच समन्वय और एकजुटता को और मजबूत करने के प्रयास के रूप में देखी जा रही है। रैली का उद्देश्य केंद्र की नीतियों के विरोध में विपक्षी एकता का प्रदर्शन करना और जनता के मुद्दों को सामने लाना है।

दिल्ली में गर्मजोशी से स्वागत

राष्ट्रीय राजधानी में मुख्यमंत्री स्टालिन का डीएमके के वरिष्ठ नेताओं ने गर्मजोशी से स्वागत किया। उनके स्वागत में सांसद टी आर बालू, तिरुचि शिवा, दयानिधि मारन, के कनिमोई और टी सुमति मौजूद थे। स्टालिन की इस यात्रा को तमिलनाडु के राजनीतिक और विकासात्मक मुद्दों पर केंद्र के साथ संवाद बढ़ाने के रूप में देखा जा रहा है। विपक्षी गठबंधन को मजबूत करने की दिशा में यह यात्रा उनके लिए एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है, जहां वे अपनी पार्टी और राज्य के हितों की आवाज बुलंद कर रहे हैं।