PMGSYके टेंडरों में अनियमितताओं के गंभीर आरोप
रायपुर।प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (PMGSY) के अंतर्गत जारी टेंडरों में गंभीर अनियमितताओं और मिलीभगत के आरोप सामने आए हैं। सूत्रों के अनुसार, रोड डेवलपमेंट एजेंसी रायपुर में कार्यरत प्रमुख अभियंता श्री काटारे के कार्यकाल में घोषित साझेदारों एवं उनके द्वारा धन निवेश करने वाले ठेकेदारों को अनुचित लाभ पहुँचाने की आशंका जताई जा रही है।
जानकारी के अनुसार, कुछ चहेते ठेकेदारो द्वारा कंप्यूटर ऑपरेटर से कथित सांठगांठ कर यह जानकारी प्राप्त की गई कि किस पैकेज में कितने टेंडर डाउनलोड हुए हैं, कितने ठेकेदारों ने निविदाएं भरी हैं तथा किस पैकेज में कितनी अमानत राशि (Earnest Money) जमा की गई है।
सूत्र बताते हैं कि इसी गोपनीय जानकारी के आधार पर ठेकेदारों द्वारा अपनी निविदा दरें तय की जाती हैं। जिन पैकेजों में किसी अन्य ठेकेदार द्वारा निविदा जमा नहीं की जाती या टेंडर डाउनलोड नहीं किया जाता, वहां कथित रूप से जानबूझकर अधिक दरें भरी जाती हैं। वहीं, जहां प्रतिस्पर्धा होती है, वहां पिछली निविदा आमंत्रण की दरों का विश्लेषण कर रणनीति के तहत दरें डाली जाती हैं।
सूत्रों का यह भी कहना है कि निविदा प्रकोष्ठ के कर्मचारियों द्वारा बिना उच्च अधिकारी के स्पष्ट निर्देश के इस प्रकार की शासकीय गोपनीय जानकारी का लीक होना संभव नहीं है। इससे यह आशंका और गहरी हो जाती है कि इस पूरे मामले में अधिकारियों, कर्मचारियों एवं संबंधित ठेकेदारों की मिलीभगत हो सकती है।
बताया जा रहा है कि आज भी निविदा सबमिशन से पहले इसी प्रकार की गड़बड़ी किए जाने की आशंका बनी हुई है। यदि आईटी सेल, साइबर सेल या चिप्स विभाग द्वारा तकनीकी जांच कराई जाए, तो यह स्पष्ट हो सकता है कि निविदा खुलने से पूर्व किस कंप्यूटर सिस्टम से, किस आईपी एड्रेस के माध्यम से और किस समय निविदाओं से संबंधित गोपनीय जानकारी निकाली गई।
सूत्रों के अनुसार, वर्तमान में भी बड़ी संख्या में निविदाएं भरी जानी शेष हैं, जिनमें इसी प्रकार की अनियमितता दोहराए जाने की आशंका जताई जा रही है। यदि समय रहते मामले की निष्पक्ष और तकनीकी जांच नहीं कराई गई, तो इससे शासन को भारी आर्थिक क्षति होने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।
अब देखना यह होगा कि संबंधित विभाग और शासन इस पूरे मामले को कितनी गंभीरता से लेते हैं और क्या दोषियों के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई की जाती है या नहीं।
