“संविधान दिवस पर राष्ट्रपति का संबोधन: लोकतंत्र की नींव और भारतीय समाज की समृद्धि का उत्सव”

नई दिल्ली:  26 नवंबर 2024 को भारत ने संविधान लागू होने के 75 वर्ष पूरे होने का ऐतिहासिक अवसर धूमधाम से मनाया। इस अवसर पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने संसद के सेंट्रल हॉल में आयोजित विशेष संयुक्त सत्र को संबोधित करते हुए भारतीय संविधान की महत्ता और इसकी मूल आत्मा पर जोर दिया। इस महत्वपूर्ण दिन पर राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उपराष्ट्रपति सहित कई गणमान्य हस्तियों ने भाग लिया। संविधान दिवस को और अधिक विशेष बनाने के लिए राष्ट्रपति ने स्मारक सिक्के और डाक टिकट का विमोचन किया। साथ ही, संस्कृत में संविधान की प्रति का विमोचन भी किया गया, जो भारत की प्राचीन भाषा और आधुनिक लोकतंत्र के समागम का प्रतीक है।

संविधान: लोकतंत्र की आधारशिला

अपने संबोधन में राष्ट्रपति मुर्मू ने कहा कि भारतीय संविधान हमारे लोकतांत्रिक मूल्यों की नींव है। उन्होंने संविधान सभा के सदस्यों को कृतज्ञ राष्ट्र की ओर से श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि इस महान दस्तावेज़ ने देश को न्याय, स्वतंत्रता, समानता और बंधुत्व के सिद्धांतों पर आधारित एक मजबूत लोकतंत्र का मार्ग दिखाया। उन्होंने बाबा साहेब भीमराव आंबेडकर के नेतृत्व को सराहा और संविधान सभा के सलाहकार बीएन राव के योगदान को याद किया।

राष्ट्रपति ने भारत को “लोकतंत्र की जननी” बताते हुए कहा कि यह संविधान सभा में विभिन्न समुदायों और संस्कृतियों के संगम का प्रतीक है। उन्होंने जोर देकर कहा कि संविधान केवल एक कानूनी दस्तावेज़ नहीं है, बल्कि यह हमारे देश की आत्मा और सांस्कृतिक विविधता का जीवंत प्रतिबिंब है।

राष्ट्रपति ने संविधान को “जीवंत और प्रगतिशील दस्तावेज़” बताते हुए इसके सामाजिक और आर्थिक पहलुओं की प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि संविधान ने महिलाओं, कमजोर वर्गों और समाज के वंचित समुदायों को सशक्त बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। उन्होंने न्यायपालिका द्वारा विचाराधीन कैदियों के लिए उठाए जा रहे कदमों और गरीबों को सस्ता और सुलभ न्याय दिलाने की दिशा में हो रहे कार्यों की सराहना की।

सरकार की उपलब्धियों पर प्रकाश

राष्ट्रपति ने अपने भाषण में सरकार के प्रयासों की भी प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि नारी शक्ति वंदन अधिनियम ने महिलाओं को समाज में नई ऊंचाईयां प्रदान की हैं। साथ ही, जीएसटी जैसे सुधारों ने देश के आर्थिक एकीकरण को मजबूत किया है। उन्होंने कहा कि सरकार ने गरीब और पिछड़े वर्ग के लिए बड़े कदम उठाए हैं, जैसे कि पक्के घर, बिजली, पानी, सड़क और चिकित्सा सुविधाएं प्रदान करना। उन्होंने इन प्रयासों को संविधान के सामाजिक न्याय के आदर्शों के साथ जोड़ा।

डॉ. राजेंद्र प्रसाद और संवैधानिक परंपराएं

संविधान दिवस पर राष्ट्रपति ने देश के पहले राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद को भी याद किया। उन्होंने डॉ. प्रसाद के उस विचार को दोहराया जिसमें कहा गया था कि संविधान की सफलता उन पर निर्भर करती है, जो इसका संचालन करते हैं। उन्होंने संवैधानिक परंपराओं की महत्ता पर बल देते हुए कहा कि यह परंपराएं हमारे संविधान को जीवंत बनाए रखती हैं और आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बनती हैं।

राष्ट्रीय एकता और वैश्विक योगदान का प्रतीक

राष्ट्रपति ने संविधान को राष्ट्रीय एकता का स्तंभ बताते हुए कहा कि यह देश के आदर्शों और मूल्यों का वैश्विक स्तर पर भी प्रतिनिधित्व करता है। उन्होंने भारत के अंतरराष्ट्रीय शांति और सहयोग के विचार को संविधान की दूरदर्शिता का परिणाम बताया।

देशवासियों से विशेष अपील

अंत में राष्ट्रपति मुर्मू ने सभी देशवासियों से अपील की कि वे संविधान में निहित मूल्यों को अपने जीवन में आत्मसात करें। उन्होंने कहा कि संविधान हमें न केवल अधिकार देता है बल्कि कर्तव्यों का भी बोध कराता है। उन्होंने इस अवसर पर सभी नागरिकों को संविधान दिवस की शुभकामनाएं देते हुए “जय हिंद, जय भारत” के साथ अपना संबोधन समाप्त किया।

संविधान दिवस: भारतीय लोकतंत्र का उत्सव

संविधान दिवस 2024 न केवल भारत के लोकतांत्रिक इतिहास का एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है, बल्कि यह भारतीय संविधान के आदर्शों और उसके निर्माण में लगे व्यक्तियों के प्रति सम्मान का प्रतीक भी है। यह दिन भारतीय लोकतंत्र की गहराई, व्यापकता और विविधता का उत्सव है, जो न केवल हमारे देशवासियों बल्कि पूरे विश्व के लिए प्रेरणा का स्रोत है।