“भारत का इलेक्ट्रिक वाहन उद्योग तेजी से बढ़ेगा, गडकरी ने 2030 तक 20 लाख करोड़ के लक्ष्य का जताया विश्वास”

 नई दिल्ली:  भारतीय इलेक्ट्रिक वाहन (ईवी) उद्योग आने वाले वर्षों में अभूतपूर्व तेजी से बढ़ने के लिए तैयार है, और इस पर केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने अपने बयान से और भी विश्वास जताया है। गडकरी ने कहा कि आगामी पांच वर्षों में भारत में ईवी की बिक्री में जबरदस्त वृद्धि देखने को मिलेगी और यह लाखों नई नौकरियों का सृजन करेगा। उनका अनुमान है कि भारतीय ईवी उद्योग 2030 तक 20 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच सकता है, जो अभी के 4.5 लाख करोड़ रुपये से लगभग पांच गुना ज्यादा है।

हालांकि, भारतीय ईवी उद्योग की वर्तमान स्थिति को देखते हुए, इसका विस्तार अभी शुरुआती चरणों में है। 2023 की शुरुआत से लेकर दिसंबर तक, 18 लाख से ज्यादा इलेक्ट्रिक वाहनों को पंजीकृत किया गया है, जो कुल वाहन बिक्री का 10 प्रतिशत से भी कम है। हालांकि, गडकरी का मानना है कि अगले कुछ वर्षों में ईवी की बिक्री कई गुना बढ़ेगी और इसके साथ ही भारत की स्थिति वैश्विक ईवी हब के रूप में स्थापित होगी।

इसके अलावा, गडकरी ने स्पष्ट किया कि भारत को जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता कम करने के प्रयास के तहत ईवी के अलावा वैकल्पिक ईंधन जैसे हाइब्रिड, इथेनॉल और हाइड्रोजन पर भी जोर दिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि भारत सालाना 22 लाख करोड़ रुपये के जीवाश्म ईंधन का आयात करता है, जो देश की अर्थव्यवस्था के लिए एक बड़ी चुनौती पैदा करता है और इस पर निर्भरता कम करने के लिए ईवी एक प्रभावी समाधान हो सकता है।

भारत में इलेक्ट्रिक वाहन की पहुंच अभी सीमित है, लेकिन आगामी वर्षों में इसमें तेज़ी से वृद्धि हो सकती है। वर्ष 2024 में, ईवी की बाजार हिस्सेदारी लगभग 7.4 प्रतिशत तक पहुंचने का अनुमान है। हालांकि, वैश्विक मंदी के बावजूद, भारतीय ईवी उद्योग ने इस वर्ष 30 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी देखी है, जो इस क्षेत्र के बढ़ते भविष्य की ओर इशारा करता है।

भारतीय ईवी उद्योग की बढ़ती ताकत और उसकी वैश्विक प्रतिस्पर्धा के नजरिए से गडकरी की सकारात्मकता और सरकार द्वारा इसे बढ़ावा देने की योजना काफी उत्साहजनक है। यदि यह वृद्धि दर कायम रहती है, तो भारत आने वाले समय में एक प्रमुख ईवी उत्पादक और विक्रेता के तौर पर उभर सकता है, जो न केवल स्थानीय रोजगार सृजन करेगा, बल्कि वैश्विक ईवी उद्योग में भी अपनी महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।