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पूर्व कैबिनेट मंत्री डॉ. हरिदास भारद्वाज ने जनता कांग्रेस से राज्यसभा के लिए भरा नामांकन

रायपुर। जनता कांग्रेस छत्तीसगढ़ (जे) ने पूर्व विधायक एवं कैबिनेट मंत्री, पूर्व महामंत्री अखिल भारतीय सतनामी समाज,जेसीसी(जे) केंद्रीय संसदीय बोर्ड के सदस्य एवं आयुर्वेद चिकित्सक डॉ हरिदास भारद्वाज को राज्यसभा के लिए अपना प्रत्याशी बनाया है। डॉ. हरिदास भारद्वाज ने आज जनता कांग्रेस के तीनों विधायकों- रेणु जोगी, धरमजीत सिंह एवं प्रमोद शर्मा की उपस्थिति में छत्तीसगढ़ विधानसभा में अपना नामांकन दाखिल किया। राज्यसभा नामांकन के लिए विधानसभा में दल के विधायक संख्या का 10 प्रस्तावक होना अनिवार्य है। जनता कांग्रेस छत्तीसगढ़ (जे) के तीनों विधायकों यानि पार्टी के 100 फीसदी विधायकों ने डॉ. हरिदास भारद्वाज के प्रस्तावक के रूप में हस्ताक्षर किए और नामांकन के दौरान उपस्थित रहे।
जेसीसी(जे) के वरिष्ठ नेता, पूर्व विधानसभा उपाध्यक्ष व लोरमी विधायक धर्मजीत सिंह ने कहा कि “कांग्रेस पार्टी तीन करोड़ छत्तीसगढ़वासियों में से किसी को भी राज्यसभा भेजती तो हमें कोई आपत्ति नहीं थी, ये उनका आतंरिक विशेषाधिकार है। इस तरह कांग्रेस हाईकमान की ओर से दिल्ली में दरबार लगाकर दो बाहरी प्रत्याशियों को थोप देना,स्थानीय कांग्रेसी नेताओं की गरिमा और तीन करोड़ छत्तीसगढ़वासियों की योग्यता का अपमान है। इसके पूर्व भी केटीएस तुलसी को कांग्रेस ने राज्यसभा में भेज दिया था। इस तरह बाहरी लोगों को बार बार थोपकर राज्यसभा में भेजने की परंपरा, छत्तीसगढ़ की अस्मिता को नीचा दिखाना है। हमारी लड़ाई नैतिकता पर आधारित है। ये “दिल्ली के हाईकमान बनाम छत्तीसगढ़वासियों के मान” की लड़ाई है”। हम दोनों राष्ट्रीय दलों और बसपा के विधायकों से निवेदन करते हैं कि वो अपनी अंतरात्मा की आवाज़ सुनें और थोपे गए दोनों बाहरी प्रत्याशियों को राज्यसभा जाने से रोकें।
जनता कांग्रेस छत्तीसगढ़ (जे) के राज्यसभा प्रत्याशी डॉ. हरिदास भारद्वाज ने कहा कि “मैं हार-जीत के लिए या किसी राजनीति के लिए नही बल्कि, मैं छत्तीसगढ़ के मान-सम्मान को बचाने के लिए अपना नामांकन दाखिल कर रहा हूं। हमारी लड़ाई उस दिल्ली दरबारी सोच के विरुद्ध है जो सोचते हैं कि छत्तीसगढ़ और भोले छत्तीसगढ़वासियों के साथ कितना भी अन्याय कर लो, वो मुंह नही खोलेंगे और सिर झुकाके चुपचाप हर बात मानेंगे। बाहरी प्रत्याशियों को थोपना, छत्तीसगढ़वासियों की योग्यता का अपमान है और इसे चुपचाप स्वीकारना मेरे जमीर को गंवारा नही है।

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