2,000 करोड़ के शराब घोटाले पर ईडी की सख्त कार्रवाई: कांग्रेस नेताओं और अधिकारियों के ठिकानों पर छापेमारी
रायपुर : छत्तीसगढ़ में शराब घोटाले से जुड़े मामलों की गहराई से जांच कर रही प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व आबकारी मंत्री कवासी लखमा के करीबियों के ठिकानों पर छापेमारी की है। रायपुर के धरमपुरा इलाके में स्थित कवासी लखमा के ठिकानों के साथ-साथ उनके करीबी सुशील ओझा के घर, चौबे कॉलोनी में, और उनके बेटे हरीश कवासी के सुकमा स्थित सरकारी आवास पर भी अधिकारियों ने जांच की।
इसके अलावा, सुकमा नगरपालिका अध्यक्ष राजू साहू के घर पर भी 10 से अधिक ईडी अधिकारियों ने छापे मारे। ये छापेमारी बड़े पैमाने पर समन्वित तरीके से हुई, जिसमें ईडी ने 5 गाड़ियों का इस्तेमाल किया। बताया जा रहा है कि इस बार ईडी की नजर खासतौर पर उन स्थानों पर है, जो शराब घोटाले से सीधे तौर पर जुड़े हो सकते हैं।
ईडी की जांच के अनुसार, छत्तीसगढ़ में 2,000 करोड़ रुपये से अधिक का शराब घोटाला हुआ, जिसमें सरकारी अधिकारियों और नेताओं की संलिप्तता का आरोप है। यह पूरा घोटाला अवैध सिंडिकेट के जरिए अंजाम दिया गया, जिसका संचालन भूपेश बघेल सरकार के कार्यकाल में हुआ। रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि तत्कालीन आबकारी मंत्री कवासी लखमा को भी इस घोटाले की जानकारी थी और कथित तौर पर इसमें से बड़ा कमीशन उनके पास पहुंचता था।
इस घोटाले को लेकर एंटी करप्शन ब्यूरो (एसीबी) में एफआईआर दर्ज कराई गई, जिसके बाद ईडी ने अपनी जांच तेज कर दी। ईडी की रिपोर्ट्स के मुताबिक, सरकारी अधिकारियों, शराब कारोबारियों और नेताओं ने मिलकर एक अवैध सिंडिकेट बनाया था, जो शराब की कीमतों और उत्पादन से जुड़े कामों में हेरफेर करके बड़ा घोटाला कर रहा था।
ईडी की छापेमारी ने राज्य के राजनीतिक परिदृश्य में भूचाल ला दिया है। सत्तारूढ़ कांग्रेस पार्टी के नेताओं और विपक्षी भाजपा के बीच तीखी बयानबाजी शुरू हो गई है। भाजपा ने आरोप लगाया कि सरकार ने अपने कार्यकाल में जनता के हितों की अनदेखी करके भ्रष्टाचार को बढ़ावा दिया, जबकि कांग्रेस ने इसे राजनीतिक प्रतिशोध बताया है।
शराब घोटाले और इसमें कथित रूप से शामिल बड़े नामों के सामने आने से जनता का ध्यान इस मामले पर केंद्रित हो गया है। लोग यह जानने के लिए उत्सुक हैं कि क्या ईडी की कार्रवाई में ऐसे साक्ष्य सामने आएंगे, जो घोटाले के मास्टरमाइंड तक पहुंचने में मदद करेंगे।
यह छापेमारी केवल कानूनी कार्रवाई तक सीमित नहीं है, बल्कि यह छत्तीसगढ़ की राजनीति और प्रशासनिक ढांचे को झकझोरने का संकेत भी देती है। आने वाले दिनों में जांच के नतीजे राज्य की राजनीति और कानून-व्यवस्था की दिशा को प्रभावित कर सकते हैं।
