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डॉ. दिनेश मिश्र ने कहा-अंधविश्वास से बचें,आकाशीय बिजली गिरने पर पीड़ित को तुरंत अस्पताल ले जाएं

रायपुर। वरिष्ठ नेत्र विशेषज्ञ एवं अंधश्रद्धा निर्मूलन समिति के अध्यक्ष डॉ. दिनेश मिश्र ने कहा बरसात के मौसम में बारिश के साथ बादलों की गड़गड़ाहट और बिजली गिरने की अनेक घटनाएं सामने आती हैं। इसमें व्यक्ति को त्वरित चिकित्सकीय उपचार की आवश्यकता होती है, पर अंधविश्वास के चलते पीड़ित व्यक्ति को गोबर के गड्ढे में कंधे तक गाड़ कर इलाज करने के मामले छत्तीसगढ़, बिहार ,झारखण्ड, ओडिशा के ग्रामीण अंचलों से सामने आते हैं।

गंभीर रूप से घायल मरीज को अस्पताल पहुंचाने की बजाए गोबर के गड्ढे में डालकर ठीक होने का इंतजार करते रहना ,इलाज नहीं,अंधविश्वास है।
डॉ. दिनेश मिश्र ने कहा कुछ दिनों पहले जशपुर ,सरगुजा में 3 व्यक्तियों पर बिजली गिरी थी। वे बुरी तरह घायल हो गए थे,वहां उन्हें ग्रामीणों ने उपचार के लिए एक गड्ढे में डाल कर गोबर भर दिया। बाद में समझाने बुझाने पर उन्हें अस्पताल भेजा गया,लेकिन तब तक उनकी मृत्यु हो गई थी। छत्तीसगढ़ के ग्रामीण अंचल सरगुजा के बैकुंठपुर कोरिया, रायगढ़ तथा अन्य ग्रामीण क्षेत्र से बिजली गिरने पर गोबर के गड्ढे में डालने की घटनाएं सामने आई है,इनमें पीड़ित व्यक्ति अपनी जान से हाथ धो बैठता है।


डॉ.दिनेश मिश्र ने बताया दुनिया में हर साल बिजली गिरने की करीब 2 लाख 40 हज़ार घटनाएं दर्ज होती हैं। इन घटनाओं में कितनी जानें जाती हैं। इसे लेकर कई तरह के अध्ययन अलग आंकड़े बताते हैं।एक स्टडी की मानें तो दुनिया में 6 हज़ार लोग हर साल बिजली गिरने से मारे जाते हैं।


दूसरी तरफ, नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो की मानें तो सिर्फ
भारत में प्रतिवर्ष करीब 2500 व्यक्तियों की मृत्यु बिजली गिरने से होती है, जबकि इनसे कई गुना व्यक्ति बिजली गिरने से आहत होते है। अनेक व्यक्ति अस्पताल पहुंचाए जाने के पहले ही दम तोड़ देते हैऔर हजारों तो कुछ अंधविश्वास और स्थानीय स्तर पर झाड़फूंक ,उपचार करते रहने के कारण अस्पताल ही नहीं ले जाये जाते कुछ मामलों में तो पीड़ित को 2 घण्टे गोबर में गाड़ने पर ठीक नही होने पर उसे दुबारा गोबर में ही गाड़ दिया गया।


डॉ दिनेश मिश्र ने बताया बरसात के मौसम बिजली गिरने का खतरा बना रहता है इसलिए जब बरसात हो रही हो ,बादल गरज रहे हों तब व्यक्ति को सावधानियां रखना चाहिए। जैसे बिजली के उपकरणों को बंद रखें,लैंडलाइन फोन का उपयोग न करें, पेड़,बिजली के खम्भे, ऊंचे स्थानों के पास न खड़े हों,धातु /मेटल के उपकरण मशीने,बाइक, का उपयोग न करें,यहां तक धातु के हेंडल वाले छाते का उपयोग न करें .यदि स्नान कर रहे हो तब भी नदी ,नाले तालाबों से बाहर निकलें,बचाव के लिए जमीन पर न लेटें बल्कि बैठे घुटनों पर हाथ रख सिर झुका बैठे सिर जमीन पर न टिकाएं ।घर,दुकान ,बिल्डिंगों में तड़ित चालक लगाएं।


डॉ. दिनेश मिश्र ने कहा कि बिजली गिरने से पीड़ित मरीज को गोबर से भरे गड्ढे में गाड़ कर रखना,झाड़ फूंक करना,उसे ठंडे पानी से नहलाना उस मरीज के स्वास्थ्य के साथ, अंधविश्वास तथा आपराधिक लापरवाही है। इससे उस प्रभावित मरीज की बचने की संभावना कम हो जाती है बल्कि शासन को ऐसे स्थानों को चिन्हित कर वहां बरसात के मौसम में कम से कम 10 बिस्तरों का इंटेंसिव केयर यूनिट बना कर त्वरित चिकित्सकीय सहायता उपलब्ध करानी चाहिए,ताकि लोगों की प्राण रक्षा की जा सके।

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