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मुख्य सचिव ने की सहकारिता विभाग के कार्यों की समीक्षा,कहा-फसल चक्र परिवर्तन करने वाले किसानों को प्रोत्साहित करें

रायपुर। मुख्य सचिव अभिताभ जैन ने बुधवार को मंत्रालय में सहकारिता विभाग के काम-काज की समीक्षा की। उन्होंने फसल चक्र परिवर्तन करने वाले किसानों को प्रोत्साहित करने के निर्देश दिए। गन्ना उत्पादक किसानों को वर्मी कम्पोस्ट के उपयोग करने हेतु प्रेरित करने के निर्देश भी अधिकारियों को दिए।
मुख्य सचिव ने सहकारिता विभाग के अधिकारियों से कहा कि शक्कर कारखानों में हानि कम हो इसके लिए विशेष प्रयास करें। उन्होंने कहा कि सहकारिता से किसानों को अधिक से अधिक फायदा पहुंचाने के लिए कार्य किया जाना चाहिए। बैठक में प्रदेश में किसानों के लिए ज्यादा से ज्यादा बैंक शाखाओं, एटीएम, किसान क्रेडिट कार्ड का विस्तार करने के लिए बैंकों को लक्ष्य दिए जाने पर विस्तार से विचार-विमर्श किया गया। बैठक में अधिकारियों ने बताया कि इस साल करीब 50 एटीएम स्थापित किए जाएंगे। प्रदेश में सहकारी समितियों के माध्यम से किसानों को खरीफ सीजन में उर्वरक वितरण करने के लिए तीन लाख 23 हजार मीट्रिक टन उर्वरक का भण्डारण किया गया है। इसी तरह से मार्कफेड के डबल लॉक केन्द्रों में 6.97 लाख मीटिरिक टन खाद भण्डारित किया गया है।
मुख्य सचिव ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि शीघ्र ही धान उपार्जन केन्द्रों में शेष रह गई धान का उठाव शीघ्र कर लें। बैठक में मुख्य सचिव ने खरीफ सीजन के लिए कृषि ऋण वितरण की स्थिति की समीक्षा की। उन्होंने फसल चक्र परिवर्तन के अंतर्गत धान के अलावा अन्य फसलों के लिए ऋण लेने वाले किसानों को और प्रेरित करने की बात अधिकारियों से कही। सहकारिता विभाग के अधिकारियों ने बताया कि इस वर्ष 2022-23 में किसानों को 5800 करोड़ रुपए के अल्प कालीन कृषि ऋण वितरण करने का लक्ष्य रखा गया है। इसमें से करीब दो हजार करोड़ रुपए से अधिक का ऋण वितरित कर दिया गया है।
बैठक में विभिन्न सहकारी संस्थाओं के निर्वाचन की स्थिति, गन्ना कारखानों में एथेनॉल संयंत्र की स्थापना की स्थिति, कोण्डागांव मक्का प्रोसेसिंग इकाई की प्रगति तथा मार्कफेड की राइस मिलों का व्यवसायिक उपयोग करने के संबंध में विस्तार से समीक्षा की गई। बैठक में बेमेतरा जिले में पीपीपी मॉडल से शक्कर कारखाना स्थापित करने की संभावनाओं पर विचार-विमर्श किया गया। इसी तरह से सहकारी शक्कर कारखानों में पॉवर प्लांटों के संचालन की स्थिति और शक्कर कारखानों की विगत तीन वर्षों की लाभ-हानि की स्थिति की विस्तार से चर्चा की गई।

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