सोनाखान को तहसील बनाने मुख्यमंत्री ने की घोषणा
राजधानी के जयस्तंभ चौक पर शहीद वीर नारायण सिंह की आदमकद प्रतिमा लगाई जाएगी : मुख्यमंत्री भूपेश बघेल

मुख्यमंत्री ने सोनाखान को दी 28 करोड़ के विकास कार्यों की सौगात
शहीद के परिजनों का मुख्यमंत्री ने किया सम्मान


रायपुर :-राजधानी रायपुर के जयस्तंभ चौक पर शहीद वीर नारायण सिंह की आदमकद प्रतिमा स्थापित की जाएगी। जयस्तंभ चौक पर ही 10 दिसम्बर 1857 को तत्कालीन अंग्रेजी सरकार द्वारा शहीद वीर नारायण सिंह को फांसी दी गई थी।
मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने सोनाखान (जिला बलौदाबाजार) के शहीद स्मारक में वीर नारायण सिंह को उनके बलिदान दिवस पर श्रद्धांजलि देने के उपरांत आयोजित आमसभा को सम्बोधित करते हुए इस आशय की घोषणा की।
बघेल ने सोनाखान को तहसील बनाने का भी ऐलान किया है। मुख्यमंत्री ने इस अवसर पर शहीद स्मारक परिसर में शहीद वीरनारायण सिंह की घोड़े पर सवार आदमकद प्रतिमा का अनावरण भी किया।
उन्होंने यहां 28 करोड़ 60 लाख रूपये के विभिन्न विकास कार्यों की सौगात भी दी। इनमें 9 करोड़ 60 लाख रूपये की बंगलापाली से महराजी मार्ग पर जोंक नदी में निर्मित पुल एवं 16 करोड़ की लागत से एकलव्य छात्रावास का लोकार्पण तथा कुरूपाठ में 2 करोड़ 67 लाख रूपये की लागत से कुरूपाठ में सीढ़ी निर्माण के प्रथम चरण का भूमिपूजन कार्य शामिल है।


मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने मुख्य मंच पर शहीद वीर नारायण सिंह के परिजनों का शॉल एवं श्रीफल भेंटकर सम्मानित किया। उन्होंने राज्य सरकार द्वारा शहीद के वंशजों के बढ़ाये गये मासिक पेंशन स्वीकृति आदेश पत्र भी प्रदान किये।
आदेश के तहत अब प्रतिमाह उनके वंशजों को 10 हजार रूपए पेंशन मिलेगी। इसके पहले मासिक पेंशन केवल एक हजार रूपये मिलता था।
मुख्यमंत्री बघेल ने सोनाखान इलाके के पांच ग्राम- कुकरीकोना, उपरानी, अचानकपुर, पटियापाली एवं गितपुरी की ग्राम सभा को सामुदायिक वन संसाधन अधिकार पत्र भी वितरित किये। सोनाखान कॉलेज की मेधावी छात्र-छात्राओं को भी मुख्यमंत्री ने सम्मानित किया।
मुख्य अतिथि की आसंदी से सम्बोधित करते हुए मुख्यमंत्री बघेल ने कहा कि छत्तीसगढ़ में अंग्रेजी सरकार के खिलाफ बगावत का बिगुल शहीद वीर नारायण सिंह ने फूंका था। उनके बलिदान दिवस पर उन्हें याद करके हम गौरवान्वित महसूस करते हैं।
उन्होंने कहा कि हमारी सरकार शहीद वीर नारायण सिंह के आदर्शों पर चलकर गांव, गरीब और किसानों के कल्याण में जुटी हुई है। किसानों के आर्थिक सामाजिक विकास के कार्यों से हम जरा भी पीछे नहीं हटेंगे। किसानों का सर्वागीण विकास हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है। विपरित परिस्थितियों एवं अड़गेबाजी के बावजूद हम किसानों की उपज का घोषणा के अनुरूप खरीदी कर रहे हैं। दिनों-दिन हम किसानों से ज्यादा मात्रा में धान खरीदी कर रहे हैं। इस वर्ष 1 करोड़ 5 लाख मीटरिक टन धान खरीदी का लक्ष्य रखा है।

मुख्यमंत्री बघेल ने कहा कि हमारी सरकार ने किसानों के लंबित लगभग 400 करोड़ रूपये की सिंचाई कर माफ किया है। तेन्दूपत्ता की खरीदी मूल्य 2500 रूपये से बढ़ाकर 4 हजार रूपये प्रति मानक बोरा किये हैं। पहले केवल 7 प्रकार के लघु वनोपजों की खरीदी की जाती थी, इसे बढ़ाकर हम 52 प्रकार के वनोपजों की खरीदी कर रहे हैं। इनका लाभकारी समर्थन मूल्य भी राज्य सरकार ने घोषित कर रखा है।
पूरे देश में छत्तीसगढ़ पहला प्रदेश है जिसने कोदो-कुटकी एवं रागी जैसे फसलों का समर्थन मूल्य घोषित किया है। इस दर पर हम सरकारी खरीदी भी कर रहे हैं। हम बरसों से वन भूमि पर काबिज लोगों को वन अधिकारी पट्टा भी वितरित कर उन्हें चिंता से मुक्त कर दिये हैं। राज्य में लगभग साढ़े 4 लाख लोगों को वन भूमि का पट्टा वितरित किया गया है।
छत्तीसगढ़ इस मामले में भी पहला राज्य है कि इसने गोबर को भी किसानों और ग्रामीणों की आमदनी का जरिया बना दिया है। हम एक रूपये में चाऊर दे रहे हैं और 2 रूपये में लोगों से गोबर खरीद रहे हैं। इस तरह की व्यवस्था देश में और कहीं नहीं है।

बघेल ने कहा कि किसानों को धान खरीदी में किसी तरह की परेशानी नहीं होगी। बारदाने का मूल्य हमने 18 रूपये से बढ़ाकर 25 रूपये कर दिए हैं। पिछले दस दिनों में 13 लाख 85 हजार मीटरिक टन धान की खरीदी हो चुकी है। मुख्यमंत्री ने गौठान में पशुओं को चारा उपलब्ध कराने के लिए किसानों को पैरादान करने का अनुरोध किया। उन्होंने कहा कि खेतों में अभी बड़ी मात्रा में पैरा उपलब्ध है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि गौठानों में महिला समूहों द्वारा निर्मित वर्मी कम्पोस्ट गुणवत्ता पूर्ण खाद है। डीएपी खाद का यह अच्छा विकल्प है। पिछले महीनों में जब डीएपी की कमी थी तो वर्मी कम्पोस्ट के रूप में इस खाद के विकल्प के रूप में काम आया है। इससे हमारे उपज का उत्पादन बढ़ा है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि शहीद वीर नारायण सिंह ने समाज में असमानता को दूर करने का भी बीड़ा उठाया था। उनके इस आदर्श पर हमारी सरकार चल रही है। गौठान केवल गायों के ठहराने भर के स्थल नहीं हैं, बल्कि रूरल इण्डस्ट्रियल पार्क के तौर पर विकसित किये जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि पिछले तीन सालों में हमने छत्तीसगढ़ की संस्कृति और परम्पराओं का सम्मान करते हुए अनेक अवकाश की घोषणा की है। इस कड़ी भी छेरछेरा पर्व पर भी इस साल से अवकाश रहेगा।

