केन्द्र ने उच्चतम न्यायालय से राजद्रोह कानून के खिलाफ दायर की गई याचिकाएं रद्द करने का अनुरोध किया

नई दिल्ली :- केन्‍द्र ने राजद्रोह कानून को सही ठहराते हुए उच्‍चतम न्‍यायालय से इस कानून को चुनौती देने वाली याचिकाओं को खारिज करने का अनुरोध किया है।

प्रधान न्‍यायाधीश एन.वी. रमना की अध्‍यक्षता वाली तीन सदस्‍यों की पीठ राजद्रोह कानून की संवैधानिक वैधता को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई कर रही है। इस पीठ में न्‍यायमूर्ति सूर्यकांत और हिमा कोहली शामिल हैं।

न्‍यायालय में दाखिल शपथ-पत्र में केन्‍द्र ने कहा है कि तीन न्‍यायाधीशों की पीठ राजद्रोह कानून की वैधता की समीक्षा नहीं कर सकती और यह मामला बड़ी पीठ को सौंपा जाना चाहिए।

सरकार का कहना है कि केदारनाथ बनाम बिहार राज्‍य के मामले में संविधान पीठ का निर्णय बाध्‍यकारी है और इस पर पुनर्विचार की कोई आवश्‍यकता नहीं है।

1962 में, केदारनाथ सिंह मामले में पांच न्‍यायाधीशों की पीठ ने राजद्रोह कानून को सही ठहराया था। सरकार ने यह भी कहा है कि राजद्रोह कानून के दुरूपयोग से पांच न्‍यायाधीशों की पीठ के पूर्व के निर्णय पर पुनर्विचार का आधार नहीं बनता।

उच्‍चतम न्‍यायालय इस मामले में मंगलवार को फिर सुनवाई करेगा।