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10 जून तक सरस्वती शिशु मंदिर स्कूल देवेंद्र नगर में शिविर,संस्कृत भारती छत्तीसगढ़ संगठन ने भाषा के महत्व को बताने की विशेष पहल

रायपुर। संस्कृत भारती छत्तीसगढ़ संगठन की ओर से धारा प्रवाह संस्कृत में वार्तालाप करने, संस्कृत की बारीकियों को सीखने और विज्ञान के अविष्कार में संस्कृत का महत्व बताने के लिए शिविर लगाया गया है। शुक्रवार से आवासीय संस्कृत प्रशिक्षण शिवर का आरंभ किया गया है। यह शिविर 10 जून तक सरस्वती शिशु मंदिर स्कूल देवेंद्र नगर रायपुर में होगा। इसमें छत्तीसगढ़ के सभी जिलों के संस्कृत प्रेमी, संस्कृत अनुरागी विद्वान एवं छात्र छात्राएं, पुरुष एवं महिलाएं भाग लेने पहुंचे हैं।
संस्कृत भारती छत्तीसगढ़ के प्रांतमंत्री डॉ. दादूभाई त्रिपाठी एवं प्रचार प्रमुख पं. चन्द्रभूषण शुक्ला ने बताया कि इस शिविर का शुभारंभ डाॅ. युधिष्ठिर लाल शदाणि ( नवम पीठाधीश सिंधी समाज सदाणी दरबार) डाॅ. प्रताप पिंजानी (ncpsl )पूर्व अध्यक्ष, परमात्मानन्द (पूर्वाध्यक्षः संस्कृत विद्यामण्डल छत्तीसगढ) डाॅ. सतेन्द सिंह सेंगर (संस्कृत भारती प्रान्ताध्यक्ष) पूर्व कुलपति इन्दिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय ने मां सरस्वती पूजन एवं दीप प्रज्ज्वलन के साथ किया। शिविर में संस्कृत में बातचीत करना, संस्कृत में गीत गाना, संस्कृत में खेल खेलना, हमारे दैनिक उपयोग की वस्तुओं को साग-सब्जियों, रसोई मसाला आदि को संस्कृत में क्या बोलते हैं,ये सब सिखाया जायेगा। साथ ही प्रात: योग व्यायाम, ध्यान के साथ संस्कृत के विभिन्न ग्रंथों, वेदों मे संस्कृत के सूत्र, विज्ञान के अविष्कार में संस्कृत, हमारे देश की संस्कृति, संस्कार और देशभक्ति, संस्कृत व्याकरण, संस्कृत मे कहानी, चुटकुले आदि सब निशुल्क सिखाया जाएगा। शुभारंभ अवसर पर अतिथियों ने इस शिविर की भूरि भूरि प्रशंसा की। संस्कृत से होने वाले लाभ, कैरियर के रूपए संस्कृत, विभिन्न ग्रंथों को समझने के लिए संस्कृत क्यों आवश्यक है,इसके संबंध में विस्तार से अतिथियों ने वक्तव्य दिए।
सहमंत्री डॉ. गोपेश तिवारी ने बताया कि संस्कृत भारती संगठन एक अखिल भारतीय संगठन है,जो विगत 40 वर्षों से संस्कृत भाषा के प्रचार प्रसार में कार्यरत है,जो कि आज तक हजारों लोगों को प्रशिक्षण दे चुकी है। कैरियर और रोजगार के मामले में संस्कृत भी अन्य किसी विषय से कम नही है। पिछले दो वर्ष से कोरोना महामारी के कारण यह शिविर नहीं हो पाया था,इसलिए इस बार बड़े उत्साह से सब भाग ले रहे हैं। संस्कृत भारती संस्था का मुख्य उद्देश्य संस्कृत भाषा का पुनरूत्थान, संस्कृत भाषा का प्रचार प्रसार, संस्कृत के माध्यम से देश सेवा एवं संस्कृत को बोलचाल की भाषा बनाना है। इस शिविर में अधिकतर अविष्कार का मूल सूत्र संस्कृत के प्राचीन ग्रन्थों, वेद, उपनिषदों में वर्णित है। इसकी प्रदर्शनी लगाई जाएगी, ताकि प्रशिक्षण ले रहे प्रशिक्षणार्थियों के साथ और आमजन भी संस्कृत की महत्ता को जान सकें। इस शिविर को डॉ. सत्येंद्र सिंह सेंगर, डॉ. राजकुमार तिवारी, डॉ. दादूभाई त्रिपाठी, डॉ. गोपेश तिवारी, डॉ. वैभव कान्हे, हेमंत साहू, दुर्गेश तिवारी, प्रफुल्ल त्रिपाठी, होमेश्वर चंद्राकर जैसे संस्कृत के विद्वानों का मार्गदर्शन मिलेगा।

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