बांग्लादेश में हिंदू मंदिरों पर हमले, भारत ने जताई चिंता: धार्मिक स्थलों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग
ढाका: हाल ही में बांग्लादेश की राजधानी ढाका के तांतीबाजार क्षेत्र में दुर्गा पूजा के एक मंडप पर हुए हमले और सतखीरा के जेशोरेश्वरी काली मंदिर में चोरी की घटनाओं ने देश में अल्पसंख्यकों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। इन हमलों ने न केवल बांग्लादेश के हिंदू समुदाय को चिंता में डाल दिया है, बल्कि भारत सरकार को भी इन घटनाओं पर सख्त प्रतिक्रिया देने के लिए मजबूर किया है। भारत के विदेश मंत्रालय ने इन घटनाओं को लेकर गहरी चिंता जताई है और बांग्लादेश सरकार से अल्पसंख्यक हिंदू समुदाय और उनके धार्मिक स्थलों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग की है।
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने इन घटनाओं को “घृणित कृत्य” करार दिया है। उन्होंने कहा कि यह घटनाएं एक निर्धारित योजना का हिस्सा प्रतीत होती हैं, जिसमें खासतौर से हिंदू मंदिरों और पूजा स्थलों को निशाना बनाया जा रहा है। तांतीबाजार में पूजा मंडप पर हुए हमले को लेकर उन्होंने बताया कि हमलावरों ने ‘क्रूड बम’ फेंका, जो कांच की बोतल में पेट्रोल भरकर बनाया गया था। इस हमले से मंडप में हल्की आग लग गई थी, हालांकि, इस घटना में किसी की जान नहीं गई। यह घटना शुक्रवार को उस समय हुई, जब स्थानीय हिंदू समुदाय दुर्गा पूजा के लिए मंडप में एकत्रित था। युवकों के एक समूह ने मंडप के पास बम फेंका और फिर हमले के बाद मौके से फरार हो गया। जब स्वयंसेवकों ने हमलावरों का पीछा करने की कोशिश की, तो उन पर चाकू से हमला किया गया।
सतखीरा के जेशोरेश्वरी काली मंदिर में हुई चोरी की घटना ने भी भारत सरकार की चिंता को और बढ़ा दिया है। इस मंदिर को बांग्लादेश के सबसे पुराने और पवित्र स्थलों में से एक माना जाता है। मंदिर में चोरी की इस घटना ने हिंदू समुदाय की धार्मिक आस्थाओं पर आघात किया है। भारत ने इन हमलों को एक व्यवस्थित पैटर्न का हिस्सा बताते हुए बांग्लादेश सरकार से अल्पसंख्यकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग की है। जायसवाल ने कहा, “हम बांग्लादेश सरकार से आग्रह करते हैं कि वे इस त्योहारी सीजन के दौरान विशेष रूप से हिंदू समुदाय और अन्य अल्पसंख्यकों की सुरक्षा पर ध्यान दें, ताकि इस तरह की घटनाएं दोबारा न हों।”
बांग्लादेश में हिंदू अल्पसंख्यकों के खिलाफ हो रहे हमलों की यह घटनाएं नई नहीं हैं। हर साल दुर्गा पूजा के समय ऐसे हमले सामने आते हैं, जो अल्पसंख्यक समुदाय की सुरक्षा को लेकर चिंता पैदा करते हैं। पिछले कुछ वर्षों में बांग्लादेश में हिंदू मंदिरों, मूर्तियों और पूजा स्थलों पर हमले बढ़े हैं, जिनका उद्देश्य धार्मिक असहिष्णुता और सांप्रदायिक हिंसा फैलाना है। इन घटनाओं ने बांग्लादेश के हिंदू समुदाय को असुरक्षित महसूस कराया है, जबकि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी इन हमलों की आलोचना हो रही है। भारत ने बार-बार बांग्लादेश सरकार से इन मुद्दों पर ठोस कदम उठाने की अपील की है, ताकि अल्पसंख्यक समुदाय की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके और उन्हें सुरक्षित माहौल प्रदान किया जा सके।
भारत की इस प्रतिक्रिया से साफ है कि वह बांग्लादेश में हिंदू अल्पसंख्यकों के खिलाफ हो रहे हमलों को लेकर गंभीर है और इस मामले में ठोस कार्रवाई की मांग कर रहा है। इन घटनाओं को रोकने के लिए दोनों देशों के बीच सहयोग और संवाद की आवश्यकता है। बांग्लादेश सरकार को यह सुनिश्चित करना होगा कि धार्मिक स्थलों और अल्पसंख्यकों की सुरक्षा के लिए कड़े कदम उठाए जाएं, ताकि इन हमलों को रोका जा सके और अल्पसंख्यकों को एक सुरक्षित वातावरण मिल सके।
यह मामला सिर्फ बांग्लादेश के हिंदू समुदाय की सुरक्षा का नहीं है, बल्कि धार्मिक सहिष्णुता और सांप्रदायिक सौहार्द बनाए रखने का भी है। ऐसे हमलों से न केवल सांप्रदायिक तनाव बढ़ सकता है, बल्कि क्षेत्रीय स्थिरता पर भी इसका प्रभाव पड़ सकता है। बांग्लादेश को यह समझना होगा कि धार्मिक अल्पसंख्यकों की सुरक्षा उसकी सामाजिक और राजनीतिक स्थिरता के लिए जरूरी है, और उसे अंतरराष्ट्रीय समुदाय के सामने एक सकारात्मक उदाहरण पेश करना होगा।
