“आंबेडकर विवाद: सीएम फडणवीस ने कांग्रेस को किया आड़े हाथों, अपमान के लिए देश से मांगी माफी”

नागपुर:  भारत में राजनीतिक हलचल जारी है, जहां भाजपा और कांग्रेस के बीच डॉ. भीमराव आंबेडकर को लेकर एक गंभीर विवाद उत्पन्न हो गया है। हाल ही में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह द्वारा राज्यसभा में संविधान पर चर्चा करते समय आंबेडकर से संबंधित उनके कथित बयान के बाद कांग्रेस ने आंबेडकर सम्मान सप्ताह की शुरुआत की है। कांग्रेस का आरोप है कि शाह ने आंबेडकर का अपमान किया, जबकि भाजपा शासित राज्यों के मुख्यमंत्री इस आरोप का विरोध कर रहे हैं और कांग्रेस को उनके द्वारा किए गए आरोपों के लिए कठोरता से घेर रहे हैं।

महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने इस मुद्दे पर तीखी प्रतिक्रिया दी है। फडणवीस ने आरोप लगाया कि कांग्रेस ने शाह के बयान को तोड़-मरोड़कर पेश किया है, जिससे आंबेडकर के योगदान और उनकी छवि को नुकसान पहुंचा है। फडणवीस ने कांग्रेस को आंबेडकर का बार-बार अपमान करने के लिए माफी मांगने की सलाह दी और कहा कि देश कभी कांग्रेस को इस बात के लिए माफ नहीं करेगा। उन्होंने यह भी कहा कि आंबेडकर का अपमान करने वाले बयान कांग्रेस की परंपरा का हिस्सा रहे हैं, और इस बार भी वही किया गया।

फडणवीस ने कहा कि कांग्रेस ने उनके अपने बयान को भी गलत तरीके से पेश किया, जिसमें उन्होंने नक्सलवाद और संविधान के प्रति निष्ठा को लेकर टिप्पणी की थी। इस विवाद के बीच, मुख्यमंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि भाजपा और शाह आंबेडकर का सम्मान करने वाली पार्टी हैं और कोई भी ऐसी स्थिति उत्पन्न नहीं की जा सकती, जिसमें आंबेडकर का अपमान किया जाए।

मुख्यमंत्री फडणवीस ने इस मामले को न केवल राजनीतिक मुद्दा बल्कि तकनीकी दृष्टिकोण से भी उठाया। उन्होंने बताया कि अब उनके पास डिजिटल फूटप्रिंट की तकनीक है, जिससे उन लोगों की पहचान की जा सकती है जो इस तरह के विवादों को फैलाते हैं। उन्होंने इसके साथ ही महाराष्ट्र विधानसभा चुनावों में महायुति द्वारा मिले भारी जनादेश का हवाला देते हुए कहा कि विपक्ष द्वारा फैलाई गई अफवाहों का सामना करने में उनकी पार्टी सफल रही है।

इसके अलावा, फडणवीस ने राज्य के विकास को लेकर भी कई महत्वपूर्ण बातें साझा की। उन्होंने गढ़चिरौली जिले के विकास की चर्चा करते हुए यह दावा किया कि नक्सलवाद में कमी आ रही है और राज्य सरकार ने इस मुद्दे को गंभीरता से लिया है। उन्होंने कहा कि सत्ता के साथ जुड़ी जिम्मेदारी को वो सेवा का माध्यम मानते हैं और जनता के लिए सच्ची सेवा प्रदान करने का उनका उद्देश्य है।

बीड जिले में सरपंच की हत्या का मुद्दा भी उन्होंने उठाया और उसे गंभीरता से लेने का आश्वासन दिया। इस पूरे विवाद ने भाजपा और कांग्रेस के बीच फिर से राजनीतिक तलवारें निकाल दी हैं, और यह सुनिश्चित कर दिया है कि डॉ. आंबेडकर के योगदान के प्रति दोनों दलों का नजरिया हमेशा विवादास्पद रहेगा।