जब छत्तीसगढ़ बना नहीं था तब छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री कहलाते थे सत्यनारायण शर्मा

जब छत्तीसगढ़ बना नहीं था तब छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री कहलाते थे सत्यनारायण शर्मा,बरगद के जंगल में उगे,
पनपे और अपनी अलग पहचान बनाने में सफल रहे सत्तू भैया को जन्म दिन की बहुत बहुत बधाई।

सतनारायण शर्मा राजनीतिक संघर्ष की बेमिसाल कहानी है।अविभाजित मध्यप्रदेश में उस समय शुक्ल बंधुओं का एक छात्र राज था।उस दौर में कांग्रेस उनके इशारे पर चलती थी।ऐसे में सत्यनारायण शर्मा राजनीति में अपनी जमीन तलाशने में लगे हुए थे।कांग्रेस के ही दिग्गज नेता अर्जुन सिंह ने शुक्ल बंधुओं की सत्ता को चुनौती देनी शुरू की तो उन्होंने भरोसा जताया सत्यनारायण शर्मा पर।सत्यनारायण शर्मा के साथ राधेश्याम शर्मा और गुरमुख सिंह की तिकड़ी ने उन दोनों शुक्ल बंधु के किले में सेंध लगानी शुरू की।
सत्यनारायण शर्मा ने न केवल शुक्ल बंधुओं की राजनैतिक सत्ता के पैरेलल अपनी टीम खड़ी की बल्कि अपनी राजनैतिक दूरदर्शिता से खुद को एक नए पॉवर सेंटर के रूप में स्थापित किया।एक समय ऐसा भी आया कि दिग्विजय सिंह के सबसे ताकतवर साथी के रूप में भी सामने आए और अविभाजित मध्य प्रदेश के छत्तीसगढ़ के अघोषित मुख्यमंत्री कहलाए।
छत्तीसगढ़ राज्य के अस्तित्व में आने के बाद उनकी लोकप्रियता,उनकी संगठन क्षमता जो उनकी ताकत थी वहीं उनके लिए परेशानी का कारण बनती चली गई।
इस बात में कोई शक नहीं कि राज्य बनने के बाद जब राज्य में जब नए पॉलिटिकल पावर सेंटर बनने लगे थे तब सत्यनारायण शर्मा की लोकप्रियता और राजनीतिक उनके लिए चुनौती के साथ साथ घबराहट का कारण बनी।समय के साथ कांग्रेस कमजोर होती चली गई और सत्यनारायण शर्मा गुटबाजी के शिकार होते चले गए।
इन सबके बावजूद न सत्यनारायण शर्मा की लोकप्रियता कम हुई और न ही उनकी राजनीतिक पकड़ व ताकत।बढ़ती उम्र के बावजूद सत्यनारायण शर्मा आज भी कांग्रेस के एक मजबूत आधार स्तंभ की तरह अडिग है।भैया ने मुझे भी छोटे भाई की तरह प्यार दिया और उनका प्रेम आज भी कम नहीं हुआ है।
आज उनका जन्म दिन है,बहुत बहुत बधाई सत्तू भैया।आप भी बधाई दे सकते है।