“2024: नीरज चोपड़ा ने ओलंपिक और विश्व चैंपियनशिप में अपनी अभूतपूर्व सफलता से भारतीय एथलेटिक्स को नया आयाम दिया”

नीरज चोपड़ा, जिन्हें ‘गोल्डन बॉय’ के रूप में पहचाना जाता है, पेरिस 2024 ओलंपिक में एक ऐतिहासिक प्रदर्शन करते हुए भारतीय एथलेटिक्स के सर्वोच्च शिखर तक पहुंचे हैं। चोपड़ा ने 89.45 मीटर की दूरी तक भाला फेंककर अपनी तकनीकी दक्षता और मानसिक मजबूती को साबित किया, हालांकि वह स्वर्ण पदक बरकरार रखने में सफल नहीं हो सके। स्वर्ण पदक के लिए उनसे केवल 1 सेंटीमीटर की कमी रह गई, और अंततः पाकिस्तानी खिलाड़ी अरशद नदीम ने 92.97 मीटर के साथ नया ओलंपिक रिकॉर्ड बनाते हुए स्वर्ण पदक जीता। चोपड़ा के थ्रो के प्रदर्शन के बावजूद, उनका कांस्य पदक से चूकना भारतीय एथलेटिक्स के लिए गहरा क्षण रहा।

चोपड़ा पहले भारतीय पुरुष एथलीट बन गए हैं जिन्होंने दो अलग-अलग ओलंपिक पदक (टोक्यो 2020 में स्वर्ण और पेरिस 2024 में रजत) जीते हैं। उन्होंने लगातार सुधार की ओर अग्रसर रहते हुए पेरिस में भी शानदार प्रदर्शन किया, हालांकि चार प्रयासों के दौरान उन्होंने फाउल किए, जो उनकी स्वर्ण के लिए दौड़ में सफलता में बाधा बने। उनके तीन सबसे अच्छे प्रयास (89.34 मीटर, 89.45 मीटर और 89.49 मीटर) के बावजूद वह टॉप पोजीशन हासिल नहीं कर पाए।

चोपड़ा की अंतरराष्ट्रीय यात्रा के दौरान डायमंड लीग भी उनके करियर की महत्वपूर्ण जगह रही है। 2022 में उन्होंने इस लीग का ताज जीता था, और 2023 में एक बार फिर दूसरे स्थान तक पहुंचे। उन्होंने यह प्रमाणित किया कि वह भारतीय एथलेटिक्स के एक अद्वितीय प्रतीक बन गए हैं। उनकी उड़ान लंबी है, और उनका लक्ष्य महज एक पदक नहीं, बल्कि विश्व मानक पर नाम बनाना है।

अपनी कड़ी मेहनत और निरंतरता को प्रदर्शित करने वाले नीरज चोपड़ा ने अब एक नए अध्याय की शुरुआत की है, जो उनके भविष्य के सफलता की दिशा तय करेगा। हाल ही में उन्होंने अपने कोचिंग पेडिग्री में परिवर्तन किया और दुनिया के सबसे बड़े भाला फेंक विशेषज्ञों में से एक, जान ज़ेलेज़नी, को अपना नया कोच बनाया। ज़ेलेज़नी के मार्गदर्शन में, चोपड़ा अपने खेल के अगले स्तर को छूने के लिए तैयार हैं, क्योंकि ज़ेलेज़नी खुद तीन बार के ओलंपिक स्वर्ण पदक विजेता और विश्व रिकॉर्ड धारक हैं, जिनका कारियर रिकॉर्ड एथलेटिक्स में अनमोल है।

नीरज चोपड़ा न केवल भारतीय खेलों का गौरव हैं, बल्कि उन्होंने खुद को एक वैश्विक स्टार के रूप में स्थापित किया है। उनका ओलंपिक इतिहास, चोटी पर पहुँचने का संघर्ष, और भविष्य की योजनाएं हर युवा खिलाड़ी के लिए प्रेरणा का स्त्रोत बन चुकी हैं।