बाबा गुरु घासीदास जयंती पर राज्यपाल रमेन डेका ने दी शुभकामनाएं

रायपुर:  संत बाबा गुरु घासीदास की जयंती के अवसर पर प्रदेशवासियों को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं देते हुए राज्यपाल रमेन डेका ने समाज के इस महान संत के जीवन और योगदान को स्मरण किया। राज्यपाल ने अपने संदेश में कहा कि संत बाबा गुरु घासीदास ने उस युग में सामाजिक, आर्थिक और जातीय शोषण के खिलाफ आवाज बुलंद कर समाज के दबे-कुचले वर्गों के उत्थान का मार्ग प्रशस्त किया। उन्होंने “मनखे-मनखे एक समान” का आदर्श वाक्य दिया, जो मानवता की एकता और समानता का सार्वकालिक संदेश है।

राज्यपाल ने कहा कि बाबा गुरु घासीदास ने भेदभाव और जातिवादी सोच को समाप्त कर एक समतामूलक समाज की परिकल्पना की। उनका जीवन दर्शन और उपदेश मानवता को प्रेम, समरसता और शांति के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देते हैं। उन्होंने समाज के सामंतवादी अन्याय और अत्याचार को खत्म करने की दिशा में कार्य कर समाज को एकजुट करने का अनुकरणीय प्रयास किया। उनके विचार आज भी प्रासंगिक हैं और सामाजिक कुरीतियों को दूर कर समरसता लाने के लिए महत्वपूर्ण संदेश देते हैं।

संत बाबा गुरु घासीदास के उपदेशों में सत्य और अहिंसा का संदेश मुख्य रूप से निहित है। उन्होंने “सतनाम” का प्रचार-प्रसार करते हुए जीवन को सत्य और सेवा के मूलभूत सिद्धांतों पर आधारित रखने की बात कही। बाबा गुरु घासीदास का सतनाम पंथ समाज में समानता, शांति और प्रेम का मार्ग प्रशस्त करता है और उनके आदर्श आज भी समाज के सभी वर्गों के लिए प्रेरणादायक हैं।

राज्यपाल डेका ने कहा कि बाबा गुरु घासीदास के विचारों को अपनाते हुए हमें एक ऐसा समाज बनाना चाहिए जहां जाति, धर्म और वर्ग के नाम पर भेदभाव का कोई स्थान न हो और हर व्यक्ति को समान अवसर प्राप्त हों। बाबा गुरु घासीदास की जयंती पर उनके बताए हुए सत्य, समरसता और सामाजिक एकता के मार्ग पर चलकर हमें देश और प्रदेश के विकास में अपना योगदान देना चाहिए। उनके आदर्शों को आत्मसात कर हम एक सशक्त और समतामूलक समाज की स्थापना कर सकते हैं।