मणिपुर हिंसा: उग्रवादी हमलों का सिलसिला जारी, लगातार तीसरे दिन खेत में किसान घायल

इंफाल घाटी :   मणिपुर की इंफाल घाटी में जातीय संघर्ष के कारण हालात लगातार तनावपूर्ण बने हुए हैं, और अब यहां के किसानों पर हमलों का सिलसिला बढ़ता जा रहा है। हाल ही में पूर्वी इंफाल जिले के पास सोमवार सुबह उग्रवादियों ने अचानक पहाड़ियों से गोलीबारी कर दी, जिसमें खेत में काम कर रहे एक किसान के हाथ पर चोट आई। यह घटना घाटी के बाहरी क्षेत्रों में किसानों की सुरक्षा के प्रति बढ़ती चिंता को दर्शाती है। इस हमले के बाद किसान डरे हुए हैं और कई लोग अपनी धान की फसल की कटाई करने से भी कतरा रहे हैं, जिससे उनकी आजीविका पर गंभीर असर पड़ रहा है। पुलिस और सुरक्षाबलों ने मौके पर पहुंचकर जवाबी कार्रवाई की और थोड़ी देर के लिए मुठभेड़ भी हुई, लेकिन स्थिति अभी भी अनिश्चित बनी हुई है।

इस घटना से पहले भी किसानों पर ऐसे हमले हो चुके हैं। शनिवार को चूराचांदपुर जिले के सैतोन में उग्रवादियों ने धान के खेत में काम कर रही 34 वर्षीय महिला किसान पर गोलियां चलाईं, जिससे उसकी मौके पर ही मौत हो गई। इसके बाद रविवार को इंफाल पूर्वी जिले के सनासाबी, सबुंगखोक खुनोउ और थामनापोकपी इलाकों में भी इसी प्रकार के हमले हुए। अधिकारियों के अनुसार, इन घटनाओं के कारण कई किसान खेतों में जाने से डर रहे हैं, और इस वजह से धान की फसल की कटाई में भी बाधा आ रही है।

मणिपुर में जातीय हिंसा पिछले वर्ष मई से गंभीर स्थिति में है, जब मैतेई और कुकी समुदायों के बीच विवाद ने हिंसक रूप ले लिया था। इस हिंसा में अब तक 200 से अधिक लोग अपनी जान गंवा चुके हैं और हजारों लोग अपने घर छोड़कर शरणार्थी बने हुए हैं। ये हमले न केवल ग्रामीणों के लिए खतरा बन गए हैं, बल्कि राज्य की कृषि अर्थव्यवस्था पर भी इसका गंभीर असर पड़ रहा है। प्रशासन ने हालात को संभालने के लिए सुरक्षा बलों की तैनाती बढ़ा दी है और किसानों की सुरक्षा के लिए अतिरिक्त उपाय किए जा रहे हैं।