“अमेरिका में भारतीय नेताओं की राय बंटी, श्री थानेदार ने कहा- ट्रंप नहीं हैं सही विकल्प”
वॉशिंगटन: अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव 2024 के चुनावी माहौल में भारतीय-अमेरिकी नेताओं के बीच विचारों का एक बड़ा मतभेद उभर कर सामने आया है। डेमोक्रेटिक पार्टी से सांसद श्री थानेदार और पूर्व रिपब्लिकन राजदूत निक्की हेली ने इस चुनाव के संभावित परिणामों और अमेरिका-भारत संबंधों पर पड़ने वाले प्रभावों को लेकर एक-दूसरे से बिलकुल विपरीत विचार व्यक्त किए हैं। श्री थानेदार ने स्पष्ट किया कि पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का फिर से सत्ता में आना भारत-अमेरिका के रिश्तों के लिए खतरनाक हो सकता है। उन्होंने कहा कि ट्रंप के सत्ता में लौटने से भारत के साथ व्यापार और आर्थिक प्रतिबंधों का दौर फिर शुरू हो सकता है, जिससे आम उपभोक्ताओं पर वित्तीय बोझ बढ़ सकता है। थानेदार ने ट्रंप को ‘तानाशाही प्रवृत्ति’ का नेता करार देते हुए चेताया कि उनका रवैया लोकतांत्रिक संस्थाओं के लिए भी हानिकारक हो सकता है।
थानेदार ने ट्रंप के 2020 के चुनाव परिणामों को नकारने और कैपिटल दंगे जैसी घटनाओं को लोकतंत्र के लिए शर्मनाक बताया और कहा कि यह आचरण अमेरिका के अंदरूनी और बाहरी संबंधों को प्रभावित कर सकता है। उन्होंने मिशिगन जैसे स्विंग राज्यों में कमला हैरिस को मिलने वाले समर्थन का जिक्र करते हुए कहा कि भारतीय-अमेरिकी समुदाय का वोट इन चुनावों में बेहद महत्वपूर्ण साबित हो सकता है। उन्होंने भारतीय-अमेरिकी समुदाय की विविधता पर जोर देते हुए कहा कि यह समुदाय विभिन्न सामाजिक, आर्थिक और प्रवासन मुद्दों पर अलग-अलग दृष्टिकोण रखता है, लेकिन ट्रंप की नीतियां इस समुदाय के हितों के खिलाफ जाती हैं।
वहीं दूसरी ओर, संयुक्त राष्ट्र में पूर्व राजदूत निक्की हेली ने ट्रंप के लिए अपना समर्थन जाहिर करते हुए कहा कि ट्रंप की नीतियां उपराष्ट्रपति कमला हैरिस से कहीं अधिक प्रभावी हैं। उन्होंने कहा कि वे ट्रंप से हर मुद्दे पर सहमत नहीं होतीं, लेकिन उनके विचारों का अधिकांश हिस्सा हैरिस की तुलना में बेहतर है। हेली ने आरोप लगाया कि बाइडन-हैरिस प्रशासन की नीतियों ने अमेरिका को वैश्विक मंच पर कमजोर कर दिया है, विशेषकर अफगानिस्तान की स्थिति और यूक्रेन के मुद्दे पर उनकी कूटनीतिक विफलता ने दुनिया को अधिक असुरक्षित बना दिया है। उन्होंने जोर दिया कि आव्रजन, राष्ट्रीय सुरक्षा और अर्थव्यवस्था जैसे मुद्दों पर ट्रंप का रुख अधिक सुदृढ़ है, जो देश के हित में बेहतर रहेगा।
हेली ने यह भी कहा कि दक्षिणी सीमा पर बिगड़ती स्थिति, और अफगानिस्तान से अनियंत्रित वापसी जैसी घटनाएं बाइडन-हैरिस प्रशासन की कमजोरी को दर्शाती हैं। हेली के अनुसार, इस बार के चुनाव में अमेरिकी मतदाताओं को यह तय करना है कि वे उन नीतियों का समर्थन करते हैं जो करों, मुद्रास्फीति, और सुरक्षा पर प्रभाव डालती हैं या वे ट्रंप की नीतियों के साथ जाना चाहते हैं। दोनों नेताओं के इन तीखे विचारों से यह स्पष्ट है कि भारतीय-अमेरिकी समुदाय के लिए यह चुनाव बेहद महत्वपूर्ण है, और दोनों दलों के उम्मीदवारों के प्रति उनका झुकाव चुनावी नतीजों पर अहम प्रभाव डाल सकता है।
