स्कूल के छात्र दूषित पानी पीने को है मजबूर, प्रशासन कर रहा अनदेखी

मनेन्द्रगढ़ । छत्तीसगढ़ शासन द्वारा शिक्षा के क्षेत्र में सुधार के लिए उठाए गए कई बड़े कदमों की चर्चा होती है। बच्चों को बेहतर आहार, शिक्षा और शुद्ध पेयजल मुहैया कराने के लिए लाखों रुपए खर्च किए जाते हैं। लेकिन हकीकत यह है कि लाखों रुपए खर्च करने के बावजूद भी, बच्चों को वो सुविधाएं नहीं मिल रही हैं, जो एक स्कूल में होनी चाहिए।

हम बात कर रहे हैं एमसीबी जिले के जनपद पंचायत मनेंद्रगढ़ के ग्राम पंचायत बौरीडांड के आश्रित गांव चुकतीपानी की। यहां के प्राथमिक विद्यालय में 20 बच्चे पढ़ने आते हैं, लेकिन यहां बच्चों को पीने का पानी तक उपलब्ध नहीं हो पा रहा है।विद्यालय के प्रधान पाठक, सुरेश मिश्रा, खुद दूसरे हैंडपंप से गंदा पानी मंगवाते हैं, क्योंकि स्कूल में हैंडपंप की व्यवस्था नहीं है और पानी मोटर का भी पता नहीं है। इस दूषित पानी से बच्चों की प्यास बुझाई जा रही है। लाखों रुपए खर्च करने के बाद भी स्कूल में पानी की यह दुर्दशा बनी हुई है।गांव की रसोईया गंगूबाई भी इसी समस्या से जूझ रही हैं। उनका कहना है कि मध्यान्ह भोजन बनाने के लिए दूर-दराज से पानी लाना पड़ता है। उन्होंने बताया, “अगर स्कूल में पानी की व्यवस्था होती, तो बच्चों के साथ हमारा काम भी आसान हो जाता।”

जमीनी हकीकत तो कुछ और ही बयां कर रही है। स्कूल में लगे टूटे नल, लापता बोरवेल की मोटर, और ऊपर रखी सफेद टंकी, केवल दिखावे के सामान हैं। प्रधान पाठक द्वारा कई बार स्थानीय प्रशासन और अधिकारियों को समस्या से अवगत कराया गया, लेकिन कोई समाधान नहीं हुआ। अब देखने वाली बात यह है कि लाखों रुपए खर्च होने के बाद भी, कब जिम्मेदार इस समस्या पर ध्यान देंगे और कब कार्रवाई होगी।