राज्यसभा ने सेवानिवृत्त हो रहे 72 सदस्यों को विदाई दी
नई दिल्ली :- राज्यसभा ने आज इस साल मार्च से जुलाई तक सेवानिवृत्त होने वाले 72 सदस्यों को विदाई दी।
इस अवसर पर प्रधानमंत्री ने कहा कि इन सदस्यों के जाने के साथ, शेष सदस्यों की जिम्मेदारी बढ़ जाती है क्योंकि उन्हें निवर्तमान सदस्यों की विरासत को आगे बढ़ाना होता है।
मोदी ने कहा कि उपरी सदन, देश के सभी हिस्से के लोगों की भावनाएं, दुख, दर्द और उत्साह को दर्शाता है। उन्होंने यह भी कहा कि यह सच है कि एक सदस्य के रूप में उसका सदन में बहुत योगदान होता है लेकिन यह भी सच है कि सदन सदस्यों को बहुत कुछ देता है।
प्रधानमंत्री ने कामना की कि सेवानिवृत्त होने वाले सदस्य अपने समृद्ध अनुभव को देश के कोने-कोने तक ले जाएंगे। उन्होंने यह भी सुझाव दिया कि सदस्यों को अपनी संस्मरणों को भविष्य की पीढ़ियों के लिए उपयोगी संदर्भ के रूप में लिखना चाहिए। उन्होंने सेवानिवृत्त सदस्यों से आजादी का अमृत महोत्सव के उत्सव में लोगों को प्रेरित करने का भी आग्रह किया।
राज्यसभा के सभापति एम० वेंकैया नायडू ने देश भर के विधायकों से आग्रह किया कि वे कार्य प्रदर्शन और कार्यविधि की एकता से प्रेरित हों तथा कानून बनाने वाली संस्थाओं को बाधित न करें और लोगों द्वारा उन्हें दिए गए सम्मान तथा विशेषाधिकार को बनाए रखें। उन्होंने 2017 के बाद से व्यवधानों के कारण सदन की कार्यवाही का समय 35 प्रतिशत से अधिक बर्बाद होने पर चिंता व्यक्त की।
उपसभापति हरिवंश ने कहा कि सेवानिवृत्त होने वाले सदस्य आने वाली पीढ़ी को प्रेरणा देते रहेंगे।
राज्यसभा में सदन के नेता पीयूष गोयल ने कहा कि सेवानिवृत्त हो रहे सभी सदस्यों ने अपने कार्यकाल के दौरान अपने अनुभवों और चर्चा के माध्यम से संसद की छवि को बढ़ाने में अपना बहुमूल्य योगदान दिया है। गोयल भी सेवानिवृत्त हो रहे हैं।
राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे ने उच्च सदन को विचारों का कक्ष बताते हुए कहा कि राजनेता कभी सेवानिवृत्त नहीं होते हैं और वे देश की सेवा करते रहते हैं।
डीएमके के तिरुचि शिवा ने कहा कि वे इस सदन से सेवानिवृत्त हो रहे हैं, लेकिन वे अन्य विभिन्न क्षेत्रों में योगदान देना जारी रखेंगे। सेवानिवृत्त सदस्यों में से एक, बीजू जनता दल के सांसद प्रसन्ना आचार्य ने कहा कि अपने कार्यकाल के दौरान, उन्होंने कई ऐतिहासिक विधेयकों को पारित किया। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र का मतलब बहुसंख्यक और अल्पसंख्यक दोनों को साथ लेकर चलना है। कई अन्य सेवानिवृत्त सदस्यों ने भी अपने अनुभव साझा किए तथा सदन में अपनी यादों का जिक्र किया।
बाद में राज्यसभा के सभापति ने सदन की कार्यवाही दिन भर के लिए स्थगित कर दी।
इस साल मार्च से जुलाई के दौरान कुल 72 सदस्य सेवानिवृत्त हो रहे हैं। इनमें ए०के० एंथोनी, अंबिका सोनी, पी० चिदंबरम, आनंद शर्मा, जयराम रमेश, सुरेश प्रभु, प्रफुल्ल पटेल, डॉक्टर सुब्रमण्यम स्वामी, प्रसन्ना आचार्य, संजय राउत, नरेश गुजराल, सतीश चंद्र मिश्रा, एमसी मैरी कॉम, स्वप्न दासगुप्ता, डॉक्टर नरेंद्र जाधव के अलावा केंद्रीय मंत्री निर्मला सीतारामन, पीयूष गोयल, मुख्तार अब्बास नकवी और राम चंद्र प्रसाद भी अपना कार्यकाल पूरा कर रहे हैं।
