HomeNATIONALCHHATTISGARHमनरेगाकर्मियों के हड़ताल का 55वां दिन, प्रशासन पर लगाए कई आरोप

मनरेगाकर्मियों के हड़ताल का 55वां दिन, प्रशासन पर लगाए कई आरोप

रायपुर/धमतरी। मनरेगा कर्मियों का हड़ताल 28 मई को पूरे 55 दिन हो गए। इन 55 दिनों में लगभग 1800 करोड़ रुपए से अधिक की राशि के काम मजदूरों को मिलना था वो नहीं मिल पाया। आनलाइन रिपोर्ट को गौर करे इस हड़ताल के दौरान 10 लाख मजदूरों को प्रशासन काम उपलब्ध नहीं करा पाई, जिन्होंने काम के लिए आवेदन किया था, इसका सबसे बड़ा नुकसान इन मजदूरों को होने वाला है इन्हें अनुपस्तिथि के कारण 100 दिवस का रोजगार उपलब्ध नहीं कराया जा सकेगा। ग्रामीण क्षेत्रों से एसी भी खबरे आ रही है कि हड़ताल के दौरान जिन मजदूरों ने काम किया है, प्रशासन उन्हें समयसीमा में भुगतान करने में असफल रही है। समयबद्ध मजदूरी भुगतान का प्रतिशत 100 से लुड़ककर 61.97 तक गिर गया है। जिसका ठीकरा प्रशासन अब इन कर्मचारियों पर फोड़ने की कोशिश में है। जबकि मनरेगाकर्मी को पिछले वर्ष 6 माह तक बिना वेतन के कार्य किए है, अपनी समस्याओं के निराकरण के लिए लगातार प्रशासनिक स्तर पर निवेदन आवेदन किए है। हड़ताल में जाने के पूर्व 14 मार्च को एक दिन का हड़ताल कर अनिश्चितकालीन हड़ताल में जाने की सूचना भी दे दिए थे। किंतु विभागीय प्रशासनिक अधिकारियों ने इनकी समस्याओं को कभी गंभीरता से नहीं लिया बल्कि इसके विपरित रौब दिखाते हुए दमनकारी तरीकों से हड़ताल समाप्त करने का असफल प्रयास करते रहे। अब जब पानी सर से ऊपर हो चला है तब भी प्रशासनिक तंत्र अपने अड़ियल रवैए को छोड़ने के बजाए मुख्यमंत्री को गलत गलत जानकारी देकर भरमाने का प्रयास कर रहे ,यह कहना है महासंघ के प्रांता अध्यक्ष चंद्रशेखर अग्निवंशी का।जिला कार्यकारी अध्यक्ष राधेश्याम करें ने बताया कि हमारी दो सूत्रीय मांग में दूसरे नंबर की मांग गैर वित्तीय मांग है कि जब तक सभी कर्मचारी नियमित नहीं किए जाते तब तक रोजगार सहायकों का वेतनमान निर्धारण करते हुए समस्त मनरेगाकर्मियों को पंचायतकर्मी का दर्जा दिया जाए। जो आसानी से पुरा कर जल्द हड़ताल समाप्त किया जा सकता था, किंतु प्रसानिक अधिकारियों ने गंभीरता नहीं दिखाई इसलिए यह हड़ताल इतना लंबा हुआ।

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