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छत्तीसगढ़ में क्लब फुट से पीड़ित 3962 बच्चों का हुआ निशुल्क इलाज, 3 मेडिकल कॉलेज और 7 जिला अस्पतालों में उपचार की सुविधा

रायपुर। छत्तीसगढ़ में शिशु स्वास्थ्य को सुदृढ़ करने राज्य शासन की ओर से लगातार ठोस कदम उठाए जा रहे हैं। शिशु स्वास्थ्य कार्यक्रम के अंतर्गत राज्य में क्लब फुट (Club Foot) की जन्मजात शारीरिक असामान्यताओं से जूझ रहे बच्चों का निशुल्क इलाज किया जा रहा है। राज्य में अब तक क्लब फुट से पीड़ित 3962 बच्चों का निशुल्क इलाज किया गया है।

जानिए क्या है क्लब फुट (Club foot)?

शारीरिक असामान्यताओं के कारण आमतौर पर जन्म (जन्मजात) के बाद पैरों का अंदर या बाहर की ओर मुड़ा होना या मांसपेशियों को हड्डी (Tendons) से जोड़ने वाले ऊतक (Tissues) सामान्य से कम होने के कारण पैर का लचीला होना क्लब फुट (Club foot) कहलाता है। यदि प्रारंभिक अवस्था में इस विकृति का उपचार नहीं किया जाता है तो यह विकृति आजीवन विकलांगता का कारण बन सकती है। उपचार के बिना क्लब फुट के साथ पैदा हुआ बच्चा चल, दौड़ या खेल नहीं सकता। क्लब फुट दुनिया भर में सबसे आम जन्मजात शारीरिक अक्षमताओं में से एक है। एक हजार नवजात शिशुओं में से एक से तीन शिशुओं में यह विकृति पायी जाती है।
जटिल परिस्तिथियों में ही इसकी सर्जरी की आवश्यकता होती है। प्रदेश में क्लब फुट विकृति की पहचान विभिन्न डिलीवरी पाइंट्स (सामुदायिक, प्राथमिक एवं उप स्वास्थ्य केन्द्र आदि) एवं चिरायु दल के दौरों के दौरान की जाती है। क्लब फुट होने से बच्चे का सामान्य रूप से चलना मुश्किल होता है, इसलिए आमतौर पर जन्म के तुरंत बाद इसका इलाज किया जाना उचित होता है।
जन्मजात क्लब फुट से पीड़ित बच्चों की सर्जरी की सुविधा राज्य के तीन चिकित्सा महाविद्यालयों रायपुर, राजनांदगांव और जगदलपुर तथा 7 जिला अस्पतालों रायपुर, दुर्ग, रायगढ़, बिलासपुर, कोरबा, जांजगीर एवं अम्बिकापुर) में निशुल्क उपलब्ध है।
स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग की प्रमुख सचिव डॉ. मनिंदर कौर द्विवेदी के दिशा निर्देश पर इन मेडिकल कॉलेजों और जिला अस्पतालों में 15 से 25 फरवरी तक शिविर लगाकर क्लब फुट की जांच की जा रही है।
जन्मजात क्लब फुट से ग्रस्त अशोक (परिवर्तित नाम) शासकीय माध्यमिक शाला अंडी कछार, विकासखंड पाली, जिला कोरबा में सातवीं में पढ़ता है। अशोक को चिरायु दल की ओर से स्वास्थ्य परीक्षण के दौरान शल्य चिकित्सा के लिए चिन्हांकित कर जिला अस्पताल कोरबा रिफर किया गया। जिला अस्पताल के अस्थि रोग विशेषज्ञ डाॅ. घनश्याम दीवान की ओर से उसका ऑपरेशन किया गया। उपचार के बाद अब अशोक अपने अन्य साथियों के जैसे सामान्य जीवन शैली के सभी कार्य करने में समर्थ है और पूर्णतः स्वस्थ है।

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